नि:शब्दता—वास्तुकला की भाषा

Sucheta Mehra Sucheta Mehra
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नि:शब्दता… … … यह भाषा है वास्तुशिल्प की। कहते  हैं दीवारों के भी कान होते हैं।घर की हर वस्तु कुछ कहती  सी प्रतीत होती है क्योंकि घर में लाई गई वस्तुए परिवार के पसंद की होती है तो स्वाभाविक है कि उन वस्तुओं से विशेष प्रेम होगा।आइये आपका  औरंगाबाद के वास्तुकार एवं चित्रकार इंजी. धनन्जय पुंद व्दारा निर्मित श्री पानसे के घर जिसका नाम है 'ईश छाया' से परिचय कराते हैं।जहाँ खामोशी शब्दों की तुलना में अधिक ऊँची आवाज़ रखती है। चलो इस अद्भुत निवास के टूर को शुरू करे।

बैठक कक्ष में चुप्पी बोलती है

चलिये बैठक कक्ष की ओर जहाँ की व्यवस्था स्वयं ही आपका मन मोह लेगी। खि़ड़की पर लगे पर्दे और सोफे और मचियों में कमाल का रंग संयोजन है, सोफे पर रखी रंगीन गद्दियाँ मानों एक दूसरे से मूक भाषा में पहले मैं,पहले मैं की होड़ लगा रही हैं।दोनों तरफ रखे फूलदान में फूल और बीच कोने में रखा छोटा पौधा और कक्ष में ऊपर से आता प्रकाश कक्ष में एक अद्भुत सामन्जस्य उत्तपन्न कर रहे हैं। दीवार पर लगा पंखा भी अपनी सहुलियत के अनुसार कक्ष के मूक भाषा वार्तालाप में अपनी उपस्थिति बयाँ करता दृष्टिगोचर हो रहा है। दीवार पर दोनों ओर लैम्प की भी प्रकाश व्यवस्था है।इसके विपरीत दिशा में दूरदर्शन यंत्र लगा है जिससे परिवार सभी सदस्य साथ बैठ कर मनोरंजन का आनंद ले सकें।

मूक एक्सटीरियर

सर्वप्रथम यह ईश छाया का अग्र भाग है जो तीन तल में विभाजित है भू-तल, प्रथम तल एवं व्दितीय तल।बाहर नीम के तरू की ठंडी छाया नैसर्गिक हवा से प्रफुल्लित हो अपने मौन आचरण और स्पर्श से घर पर झुक कर उसका अभिवंदन करती सी प्रतीत हो रही है।घर की ऊँची और मजबूत दीवार के बीच मुख्य प्रवेश व्दार के दाँयी ओर लकड़ी की नाम पट्टी पर अंग्रेजी में ईश छाया अंकित है।प्रथम और व्दितीय तल में सामने बालकनी दिखाई दे रही है।

अवाक भोजन कक्ष

अब चलते हैं भोजन कक्ष की ओर जहाँ पूरा परिवार साथ में भोजन करता है।कहते है भजन और भोजन हमेशा शांत वातावरण में करना चाहिए क्योंकि शांत वातावरण में भजन करने से मन और भोजन करने से तन तृप्त होता है।भोजन मेज पर रखा फूलदान ऊपर से प्रकाश फैलाते झूमर से मूक भाषा में गुफ्तगू करने में व्यस्त है।  आप ज़रा कुर्सियों की ओर गौर फरमायें तो आप देखेंगे सब मेज की गोद में कक्ष की मौनता को भंग न करते हुए आपस में ही मौन वार्तालाप में व्यस्त हैं। ऊपर छत से कहीं कहीं से झलकता प्रकाश कक्ष के सौन्दर्य में वृध्दि कर रहा है।

मूक गलियारा

यह चित्र है सीढ़ियाँ और प्रथम तल के गलियारे का,जिसमें बड़े और छोटे गोलाकृति में सी़ढ़ी के ऊपर प्रकाश का सुन्दर व्यवस्था की गई है।सीढ़ी पर आड़ के लिए पारदर्शी काँच का प्रयोग किया गया है।चित्र में  बाँयी ओर की सीढ़ियाँ भू-तल से प्रथम तल की ओर ले जाती हैं,दाँयी ओर की सीढ़ियाँ प्रथम तल के गलियारे से हो कर व्दितीय तल की ओर ले जाती हैं।

प्रकृति की गोद में

चलिये थोड़ा प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेने के लिये बालकनी की ओर रुख करते हैं।जहाँ प्रकृति उन्मुक्त आकाश के नीचे सूर्य के आभा मंडल में स्वछन्द बहती वायु के साथ अठखेलियाँ कर रही है।बालकनी में धातु की रीपों के साथ पारदर्शी काँच को जमाया गया है। बाहर का हरित वातावरण मन को हर्षित करने वाला है।ऊपर धातु का जाल लगाया गया है।  घर का प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है अर्थात घर का नज़ारा नयनाभिराम है।

अगर आपके भोजन कक्ष इतना आकर्षक नहीं लग रहा है, यह आइडिया बुक आप को प्रेरित करेगी: अपने भोजन क्षेत्र में सुधार करने के लिए 6 ट्रिक्स

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